नई दिल्ली: अफगानिस्तान में तालिबान सरकार ने स्मार्टफोन के इस्तेमाल को लेकर एक नया और सख्त आदेश जारी किया है। इस फैसले के बाद सरकारी कर्मचारियों और तालिबान से जुड़े कई लोगों को अपने स्मार्टफोन बंद करने या उनसे छुटकारा पाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। नई पाबंदियों ने देशभर में चर्चा और चिंता दोनों बढ़ा दी हैं।
रिपोर्टों के मुताबिक, तालिबान नेतृत्व की ओर से जारी निर्देश में सरकारी विभागों के कर्मचारियों और संगठन से जुड़े लोगों के लिए स्मार्टफोन के उपयोग पर रोक लगाने की बात कही गई है। आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। कई इलाकों में कर्मचारियों से स्मार्टफोन जमा कराने और उन्हें नष्ट करने की खबरें सामने आई हैं।
सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो भी वायरल हुए हैं जिनमें कुछ लोग अपने मोबाइल फोन तोड़ते हुए दिखाई दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि यह कदम नए आदेश का पालन दिखाने के लिए उठाया गया। कुछ प्रांतों में अधिकारियों ने कर्मचारियों को चेतावनी दी है कि नियम तोड़ने पर नौकरी जाने या कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
सरकारी कर्मचारियों का कहना है कि स्मार्टफोन उनके रोजमर्रा के काम का अहम हिस्सा बन चुके हैं। कई विभाग व्हाट्सऐप ग्रुप, ईमेल और अन्य डिजिटल माध्यमों के जरिए सूचनाओं का आदान-प्रदान करते थे। ऐसे में नई पाबंदियों से प्रशासनिक कामकाज प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
शिक्षकों और शिक्षा विभाग से जुड़े कर्मचारियों ने भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि छात्रों से संपर्क, ऑनलाइन जानकारी साझा करने और अनुवाद जैसे कार्यों के लिए स्मार्टफोन बेहद जरूरी हैं। कुछ कर्मचारियों ने बताया कि अब उन्हें अपने कामकाज के नए तरीके तलाशने पड़ सकते हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम सूचना के प्रवाह पर नियंत्रण बढ़ाने और आंतरिक जानकारियों के लीक होने की आशंकाओं को रोकने की कोशिश का हिस्सा हो सकता है। हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर वायरल हुए कुछ वीडियो और सूचनाओं ने भी तालिबान प्रशासन की चिंताएं बढ़ाई थीं।
मानवाधिकार और मीडिया संगठनों ने इस फैसले पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में इस तरह की पाबंदियां लोगों की सूचना तक पहुंच और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को और सीमित कर सकती हैं।
तालिबान के इस नए आदेश ने अफगानिस्तान में डिजिटल संचार और सूचना व्यवस्था के भविष्य को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि यह प्रतिबंध केवल सरकारी कर्मचारियों तक सीमित रहेगा या आगे चलकर आम नागरिकों पर भी इसका असर पड़ेगा।